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मल्हार स्कूल विवाद में नया मोड़: स्कूल प्रबंधन के समर्थकों ने जताया षड्यंत्र का अंदेशा, निष्पक्ष जांच की मांग

गणेशदत्त राजू तिवारी की रिपोर्ट

मल्हार/बिलासपुर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मल्हार में पिछले दिनों छात्राओं द्वारा कलेक्ट्रेट का घेराव कर लगाए गए आरोपों का मामला अब गरमाता जा रहा है। जहां एक ओर छात्राओं ने प्राचार्य और शिक्षकों पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम को स्कूल प्रबंधन की छवि धूमिल करने और सुनियोजित तरीके से रचा गया एक बड़ा षड्यंत्र बताया जा रहा है।
क्या है प्रबंधन और समर्थकों का पक्ष?

सूत्रों और स्कूल प्रबंधन के करीबियों का कहना है कि स्कूल में पिछले कुछ समय से शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुशासन को कड़ा किया गया था। इस कड़ाई से कुछ स्थानीय तत्व और विरोधी असहज थे। आशंका जताई जा रही है कि निर्दोष छात्र-छात्राओं को मोहरा बनाकर और उनके कंधों पर बंदूक रखकर स्कूल के स्टाफ और प्राचार्य को निशाना बनाया जा रहा है।
दावा किया जा रहा है कि बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने और अवैध वसूली जैसे जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह तथ्यहीन हैं। आंतरिक राजनीति और व्यक्तिगत रंजिश के चलते इस विवाद को जानबूझकर हवा दी गई है ताकि स्कूल के जिम्मेदार अधिकारियों को पद से हटाया जा सके।

छात्राओं के ये थे आरोप
गौरतलब है कि दो दिन पूर्व स्कूल की सैकड़ों छात्राओं ने बिलासपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनसे शिक्षकों की जगह कॉपियां जांच कराई जाती हैं, अतिरिक्त फीस वसूली जाती है और एक्सपायरी सैनिटरी पैड बांटे जाते हैं। इन आरोपों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) संदीप कुमार पांडेय ने जांच के लिए तीन प्राचार्यों की एक समिति का गठन किया है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें
इस मामले में प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों के दावों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि शिकायतें झूठी पाई जाती हैं और किसी षड्यंत्र की पुष्टि होती है, तो भड़काने वाले तत्वों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।

मल्हार हायर सेकेंडरी का विवाद छात्रों के किसी के द्वारा सिखाया गया प्रतीत होता है। यहां स्कूल जो अच्छे से संचालित हो रहा था, उसमें बाधा डालने की कोशिश की जा रही है। शासन प्रशासन की भी इसमें बदनामी हो रही है। इस सिलसिले में स्टाफ के लोगों की संदिग्ध गतिविधियों की जांच होना अति आवश्यक है। असामाजिक तत्व काम से जी चुराने वाले की ऐसी हरकतों को अंजाम देते हैं। उन्हें चिन्हांकित करके सजा दिलाना जरूरी हो गया है।
इसमें स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों की मोबाइल की जांच करने से सत्य सामने आ जाएगा कि वह बच्चों को कितने बार फोन से संपर्क किए हैं। बच्चे जो शर्मनाक नारा लगाए हैं, उसे किसने दिया है। उनके जिला प्रशासन तक पहुंचाने की व्यवस्था किसने किया है।एक ऐसे प्राचार्य जो विकलांगता की श्रेणी में पहुच चुके है , तथा जिनका सेवानिवृत्त में 6- 7 माह ही शेष है ऐसे विद्वान एवं गोल्ड मेडलिस्ट प्राचार्य के खिलाफ गंदा नारा लगाना शिक्षा विभाग के लिए दुखद है ।इन सब के पीछे किसका हाथ है इसकी सूक्ष्म जांच होना चाहिए ,स्टाफ की सलंग्नता पर कड़ी कार्यवाही की बुद्धिजीवियों एवं पालकों ने मांग की है।

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