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डामर की कीमतों पर ठेकेदारों को राहत, फिर नगर निगम की सड़कों का क्या होगा? बेलतरा की बदहाली पर उठे सवाल

गणेशदत्त राजू तिवारी की रिपोर्ट

कैबिनेट के फैसले के बाद सड़क निर्माण में भेदभाव की आशंका पर बहस तेज; अशोक नगर-बिरकोना समेत कई मार्गों का निर्माण अधूरा, अंकित गौरहा ने उठाई जवाबदेही की मांग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि के बीच राज्य सरकार ने सड़क निर्माण से जुड़े पात्र अनुबंधों को मूल्य राहत देने का निर्णय लिया है। 27 अक्टूबर 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के कार्यों के लिए 130.88 करोड़ रुपये की राहत तथा लोक निर्माण विभाग के पात्र अनुबंधों में अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था को मंजूरी दी गई। लेकिन नगर निगम क्षेत्र की सड़कों और उनसे जुड़े ठेकों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कों का मुद्दा फिर गरमा गया है। सवाल उठ रहा है कि जब बढ़ती लागत के कारण ठेकेदारों को राहत देने की व्यवस्था हो सकती है, तो वर्षों से निर्माण और मरम्मत की बाट जोह रही सड़कों का समाधान आखिर कब होगा?

करोड़ों की सड़कें, लेकिन जनता को राहत का इंतजार

बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में कई प्रमुख मार्गों की बदहाली और निर्माण कार्यों में देरी को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानी लगातार सामने आ रही है। इनमें प्रमुख रूप से अशोक नगर से बिरकोना पहुंच मार्ग, गुरुनानक चौक से राजकिशोर नगर पहुंच मार्ग, अपोलो चौक से रपटा पहुंच मार्ग और साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी पहुंच मार्ग शामिल हैं।

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, अशोक नगर-बिरकोना मार्ग के लिए 17 करोड़ रुपये, गुरुनानक चौक-राजकिशोर नगर मार्ग के लिए 9 करोड़ रुपये, अपोलो चौक-रपटा मार्ग के लिए 10 करोड़ रुपये तथा साइंस कॉलेज-सब्जी मंडी मार्ग के लिए 3 करोड़ रुपये की लागत का उल्लेख किया गया है। इन मार्गों के निर्माण, मरम्मत और वर्तमान कार्यस्थिति को लेकर संबंधित विभागों से स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।

जर्जर सड़कों, गड्ढों और धूल के कारण राहगीरों तथा वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटनाओं की आशंका और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच स्थानीय लोग जानना चाहते हैं कि इन सड़कों का काम कब शुरू होगा और कब पूरा किया जाएगा।

PWD के पात्र ठेकों को राहत, निगम की सड़कों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक वास्तव में खरीदे और उपयोग किए गए डामर पर 130.88 करोड़ रुपये की बजटीय राहत का प्रावधान किया गया है। वहीं, राज्य वित्तपोषित लोक निर्माण विभाग के उन पात्र सड़क अनुबंधों को भी राहत मिलेगी, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पहले प्राप्त हुई थीं। इन अनुबंधों में 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक खरीदे और उपयोग किए गए डामर पर राहत दी जाएगी। इसके लिए लगभग 70 से 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय का अनुमान है।

हालांकि, नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी सड़क अनुबंधों पर इस निर्णय का लाभ स्वतः लागू होने की पुष्टि नहीं है। ऐसे में सवाल है कि नगर निगम क्षेत्र की उन सड़कों के लिए क्या व्यवस्था होगी, जिनके निर्माण या मरम्मत में लागत वृद्धि और ठेका संबंधी समस्याएं बाधा बन रही हैं?

स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार और नगर निगम इस विषय पर स्पष्ट नीति सामने लाएं, ताकि ठेकेदारों और विभागों के बीच भुगतान संबंधी विवादों का खामियाजा आम जनता को न भुगतना पड़े।

अशोक नगर-बिरकोना मार्ग के हस्तांतरण पर भी सवाल

अशोक नगर से बिरकोना पहुंच मार्ग को लेकर विभागीय हस्तांतरण का मुद्दा भी चर्चा में है। आरोप है कि लोक निर्माण विभाग की सड़क को नगर निगम को हस्तांतरित किए जाने के बाद निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और सड़क विवादों में उलझ गई।

इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, हस्तांतरण के कारणों, निर्णय प्रक्रिया और निर्माण में देरी के लिए जिम्मेदार पक्ष के संबंध में आधिकारिक दस्तावेजों और विभागीय जवाब का सामने आना आवश्यक है।

यदि सड़क हस्तांतरण के बाद निर्माण कार्य में देरी हुई है, तो संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना किस स्तर पर लंबित है, वित्तीय या प्रशासनिक बाधा क्या है और उसे दूर करने की समय-सीमा क्या होगी।

“मेवा सदन की संस्कृति हावी”—अंकित गौरहा का आरोप

बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने सड़कों की बदहाली को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में “मेवा सदन की संस्कृति” हावी है और आम जनता की समस्याओं के बजाय व्यक्तिगत स्वार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है।

गौरहा के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र की सड़कों की स्थिति खराब बनी हुई है। सड़क निर्माण को लेकर स्वीकृति, भूमिपूजन, निरीक्षण और परीक्षण जैसी प्रक्रियाएं तो होती रहती हैं, लेकिन वास्तविक निर्माण कार्य कब पूरा होगा, इसकी जवाबदेही लेने वाला कोई नजर नहीं आता।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सड़कों के निर्माण के लिए योजनाएं और स्वीकृतियां मौजूद हैं, तो फिर काम में देरी क्यों हो रही है? जनता को केवल आश्वासन और प्रक्रियाओं की जानकारी देने के बजाय निर्माण की निश्चित समय-सीमा बताई जानी चाहिए।

जनता को भाषण नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए

डामर की बढ़ती कीमतों के बीच पात्र ठेकेदारों को राहत देने का निर्णय सड़क निर्माण कार्यों को गति देने के उद्देश्य से लिया गया है। लेकिन बेलतरा क्षेत्र की सड़कों को लेकर असली परीक्षा इस बात की होगी कि लंबित परियोजनाओं की बाधाएं कब दूर होती हैं और आम लोगों को राहत कब मिलती है।

अशोक नगर-बिरकोना, गुरुनानक चौक-राजकिशोर नगर, अपोलो चौक-रपटा और साइंस कॉलेज-सब्जी मंडी जैसे मार्गों की वास्तविक स्थिति, निर्माण की समय-सीमा और जिम्मेदार एजेंसी को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—जब डामर की बढ़ती कीमतों के बीच ठेकेदारों को राहत देने का रास्ता निकल सकता है, तो बेलतरा की जनता को बदहाल सड़कों से राहत दिलाने का रास्ता कब निकलेगा?

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