छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की छटा बिखेर रहा सुआ नृत्य, कैवर्त समाज की महिलाओं एवं बालिकाओं ने दी शानदार प्रस्तुति
गणेश दत्त राजू तिवारी कि रिपोर्ट
देवांगन समाज गणेश चौक में गूंजे पारंपरिक सुआ गीत, एस.एन. गुप्ता ने बालिकाओं को दिए नृत्य संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव
मल्हार। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक लोककलाओं को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से कैवर्त समाज की महिलाओं एवं बालिकाओं ने सुआ नृत्य का शुभारंभ किया है। इसी कड़ी में महिलाओं एवं बालिकाओं ने देवांगन समाज गणेश चौक में पारंपरिक सुआ नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। उनकी शानदार प्रस्तुति से पूरा वातावरण छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और लोकसंस्कृति के रंग में रंग गया।

इस अवसर पर प्रधान पाठक एस.एन. गुप्ता ने सुआ नृत्य के संबंध में बालिकाओं को महत्वपूर्ण सुझाव एवं मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों में सुआ नृत्य का विशेष महत्व है। यह लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
सुआ नृत्य की परंपरा में महिलाएं एवं बालिकाएं गोल घेरा बनाकर हाथों से तालियां बजाते हुए पारंपरिक गीतों की मधुर धुन पर नृत्य करती हैं। घेरे के बीच मिट्टी से निर्मित सुआ (तोते) की आकृति रखकर उसमें दीप प्रज्वलित किया जाता है। इसके बाद समूह में लोकगीत गाते हुए घर-घर जाकर नृत्य की प्रस्तुति दी जाती है। नृत्य से प्रसन्न होकर घर के मुखिया द्वारा उन्हें चावल, रुपये, तेल आदि भेंट स्वरूप प्रदान किए जाते हैं। अंत में बालिकाएं घर-परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए आशीर्वाद देती हैं और अगले घर की ओर प्रस्थान करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान “पैंया लागौं तोर, मन पारे मोहा छोर” जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों पर बालिकाओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी तालबद्ध प्रस्तुति, सामूहिक गायन और पारंपरिक अंदाज ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
इस आयोजन के माध्यम से कैवर्त समाज की महिलाओं एवं बालिकाओं ने छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया।
