

मल्हार: नवरात्रि के पावन पर्व पर मल्हार के प्राचीन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इसी कड़ी में अष्टमी की पावन तिथि पर सी. वी. रमन विश्वविद्यालय कोटा के रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद तिवारी सपरिवार मां डिडिनेश्वरी के दर्शन के लिए मल्हार पहुंचे। मां डिडिनेश्वरी के अलौकिक रूप के दर्शन कर डॉ. तिवारी भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि मल्हार की धरा और यहाँ विराजमान माता डिडिनेश्वरी की महिमा अत्यंत दिव्य, अलौकिक और अद्वितीय है। यहाँ आकर आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।
वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता संजीव पांडेय ने दी ऐतिहासिक जानकारी
डॉ. अरविंद तिवारी के मल्हार आगमन पर क्षेत्र के प्रख्यात एवं वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता संजीव पांडेय ने उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री पांडेय ने डॉ. तिवारी को मां डिडिनेश्वरी की प्रतिमा की प्राचीनता, उसकी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मल्हार का इतिहास सदियों पुराना है और यहाँ की मूर्तियां मूर्तिकला का बेजोड़ नमूना हैं। इसके बाद डॉ. तिवारी ने परिसर में स्थित अत्यंत दुर्लभ ‘कृष्णवट’ (कृष्ण बरगद, जिसकी पत्तियां दोने के आकार की होती हैं) के दर्शन भी किए और इसकी विशिष्टता को सराहा।
पुरातत्व के संरक्षण का लिया संकल्प
मल्हार के ऐतिहासिक वैभव और चारों ओर बिखरी अमूल्य प्राचीन विरासतों को देखकर डॉ. अरविंद तिवारी ने गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि मल्हार छत्तीसगढ़ का एक गौरवशाली पुरातात्विक स्थल है। यहाँ बिखरे पड़े प्राचीन पुरातत्व और मूर्तियों का संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि विश्वविद्यालय स्तर पर या व्यक्तिगत रूप से इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने और इसके संरक्षण के लिए जो भी संभव प्रयास होंगे, वे पूरी निष्ठा के साथ करेंगे।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि साहित्यकार एस एन गुप्ता, कांग्रेस प्रवक्ता मीडिया प्रभारी गणेशदत्त राजू तिवारी,मंदिर समिति के सदस्यों और स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने डॉ. अरविंद तिवारी का आभार व्यक्त किया।
