मल्हार में आस्था का सैलाब: डिडिनेश्वरी मंदिर से पातालेश्वर धाम तक निकली ऐतिहासिक ज्योति जवारा कलश शोभायात्रा *गणेशदत्त राजू तिवारी की रिपोर्ट*
मल्हार: ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी मल्हार में दशहरा उत्सव के अगले दिन एकादशी पर आस्था, भक्ति और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिला। नगर की अधिष्ठात्री देवी मां डिडिनेश्वरी मंदिर से भगवान पातालेश्वर महादेव मंदिर तक एक विहंगम और भव्य ज्योति जवारा कलश शोभायात्रा निकाली गई। मांदर की थाप, पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों और डीजे की आधुनिक धुनों के बीच निकली इस यात्रा में लगभग 4,000 ज्योति कलश शामिल थे, जिसने पूरे नगर को भक्तिमय कर दिया।
शोभायात्रा की विस्तृत रिपोर्ट और मुख्य आकर्षण नीचे दिए गए हैं:
अलौकिक विहंगम दृश्य: ‘धरती पर उतर आए सितारे ‘

शोभायात्रा का नजारा इतना अद्भुत था कि मानो रात के सुरमयी अंधेरे को चीरते हुए हजारों चमकदार तारे आसमान से सीधे धरती पर उतर आए हों। सिर पर ज्योति कलश धारण किए श्रद्धालु जब कतारबद्ध होकर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे, तो ऐसा लग रहा था जैसे आस्था की कोई जीवित नदी बह रही हो। इस पल को बेहद करीब से महसूस करने के लिए नगरवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग अपने घरों की छतों, खिड़कियों और देहरियों दरवाजों पर खड़े होकर इस विहंगम दृश्य को अपनी आंखों और दिलों में संजो रहे थे।
पारंपरिक परिधान और लोक संस्कृति का संगम
शोभायात्रा में विशेष रूप से छोटी-छोटी कन्याएं और महिलाएं पारंपरिक पीले और लाल रंग की साड़ियों में सजी-धजी थीं। सभी महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ सिर पर ज्योति कलश धारण किए, मांदर की थाप पर एक ही लय और ताल में अपने कदम (पग) आगे बढ़ा रही थीं।
पारंपरिक मांदर और लोकगीतों के साथ-साथ डीजे की धुनों ने युवाओं और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह भर दिया, जिससे पूरी यात्रा उत्सव में तब्दील हो गई।



ऐतिहासिक और अद्वितीय पल
इस भव्य आयोजन में डिडिनेश्वरी मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों सहित मल्हार और आसपास के दर्जनों गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भक्तों ने मां जवारा और ज्योति कलश के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगी और जीवन को धन्य बनाया।
मल्हार के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि शेषनारायण गुप्ता ने इस पल को शब्दों में पिरोते हुए इसे ‘अद्वितीय और ऐतिहासिक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि मल्हार का दशहरा जितना ऐतिहासिक होता है, एकादशी की यह शोभायात्रा भी उतनी ही ऐतिहासिक और जनमानस को सराबोर करने वाली रही। प्रशासन और मंदिर समिति के सहयोग से यह पूरी यात्रा शांतिपूर्ण और अत्यंत गरिमामय ढंग से संपन्न हुई।
