
गणेशदत्त राजू तिवारी कि खाश प्रस्तुति
मल्हार (बिलासपुर)। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी मल्हार में भक्ति का एक अनोखा और अलौकिक सैलाब उमड़ पड़ा है। मल्हार नगर की अधिष्ठात्री देवी, मां भगवती डिडिनेश्वरी (पार्वती) के दरबार में आस्था और विश्वास का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे अंचल को देवीमय कर दिया है। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को ही लगभग 1.5 लाख श्रद्धालुओं ने माता के अलौकिक विग्रह के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कोसों दूर से ‘कर नापते’ हुए पहुंच रहे भक्त
मां डिडिनेश्वरी की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर जायज मनोकामना सालभर के भीतर पूरी हो जाती है। यही वजह है कि सप्तमी तिथि से ही दूर-दूर से श्रद्धालु कोसों दूर से ‘कर नापते’ (कनक दंडवत या लेटकर प्रणाम करते) हुए माता के दरबार में शीश नवाने पहुंच रहे हैं। आस्था का यह कठिन मार्ग पार कर भक्त माता के प्रति अपनी अनन्य श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं।
4,200 से अधिक ज्योति कलशों से जगमगाया दरबार
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मां के भवन में श्रद्धालुओं द्वारा रिकॉर्ड संख्या में ज्योति कलश प्रज्वलित कराए गए हैं। मंदिर परिसर इस समय 271 घृत (घी) कलश, 3,931 तेल कलश और 41 ज्योति जंवारा कलशों की दिव्य रोशनी से जगमगा रहा है, जो भक्तों की अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण है।
अद्भुत चमत्कार: दिन में तीन बार स्वरूप बदलती हैं ‘डिडिगदाई’

मंदिर के अति पुराने पूर्व पुजारी गणेशदत्त राजू तिवारी बताते हैं कि स्थानीय लोग माता को बड़े लाड-प्यार से ‘डिडिगदाई’ के नाम से पुकारते हैं। उन्होंने माता के एक बड़े चमत्कार का उल्लेख करते हुए बताया कि मां भगवती दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती हैं। माता अपने भक्तों को उनकी भावनाओं के अनुरूप दर्शन देती हैं। भक्त जिस भाव और रूप में मां को पूजता है, माता की पाषाण मूर्ति में ठीक वैसा ही रूप नजर आने लगता है। इतना ही नहीं, आज भी कई भाग्यशाली भक्तों और पुजारियों को मंदिर के गर्भगृह में माता की चूड़ियों और पायल की खनखनाहट की दिव्य आवाज सुनाई देती है।
गणेशदत्त राजू तिवारी का कहना है किकुंवारी कन्याओं और सूनी गोद वालों के लिए वरदान हैं माता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां भगवती यहां कुंवारी अवस्था में भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या में लीन हैं। यही कारण है कि जिन कन्याओं के विवाह में कोई बाधा या व्याधि आ रही हो, वे यहां आकर केवल माता के दर्शन कर लें, तो उनका विवाह शीघ्र तय हो जाता है। इसके साथ ही, यह भी अटूट विश्वास है कि जिन माताओं-बहनों की गोद सूनी है, मां डिडिनेश्वरी के दर्शन मात्र से उनकी सूनी गोद हरी हो जाती है।
संस्कृति और प्रतिभा को निखार रहा मंदिर मंच
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मंदिर समिति द्वारा यहां हर वर्ष की तरह इस बार भी एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक आयोजनों की धूम है। मंदिर समिति की सबसे बड़ी और सराहनीय परंपरा यह है कि वे नई पीढ़ी और छात्र-छात्राओं को अपनी जड़ों व संस्कृति से जोड़े रखने के लिए एक भव्य मंच प्रदान करते हैं। इस नवरात्रि में भी बच्चों ने बढ़-चढ़कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दी, जिन्हें वहां उपस्थित जनप्रतिनिधियों और समिति के पदाधिकारियों द्वारा पुरस्कृत व प्रोत्साहित किया गया।
निरंतर भंडारा और सेवा का संकल्प
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष अनिल कैवर्त और सचिव संतोष कैवर्त ने बताया, “चूंकि मां भगवती स्वयं एक कन्या रूप में यहां विराजमान हैं, इसलिए हमारी समिति हर वर्ष छोटी-छोटी बालिकाओं और छात्र-छात्राओं की प्रतिभा को निखारने व उनका उत्साहवर्धन करने के लिए इस सांस्कृतिक मंच का आयोजन करती है। इससे जहां बच्चों की कला निखरती है, वहीं दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी भक्तिमय मनोरंजन का आनंद लेते हैं।” उन्होंने आगे बताया कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जो माता को भोग लगने के बाद शुरू होकर देर रात तक निरंतर चलता रहता है, जहां हजारों भक्त प्रसाद ग्रहण कर तृप्त हो रहे हैं।
