मल्हार: मल्हार स्कूल में चल रहा विवाद अब एक नया रूप ले चुका है। एक तरफ जहां विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही थीं, वहीं दूसरी तरफ विद्यालय के प्राचार्य द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र ने इस पूरे मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ला दिया है। प्राचार्य ने सीधे तौर पर स्कूल के ही कुछ शिक्षकों और स्टाफ पर विद्यार्थियों को भड़काने और साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। इस बीच, प्राचार्य कल्याण संघ भी खुलकर प्राचार्य के समर्थन में आ गया है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्राचार्य के आवेदन में सामने आए ये बड़े तथ्य
प्राचार्य द्वारा उच्च अधिकारियों को सौंपे गए आवेदन पत्र के अनुसार, स्कूल का माहौल कुछ अंदरूनी तत्वों के कारण बिगड़ा है:
- सुधार के प्रयासों का विरोध: प्राचार्य ने नवंबर 2025 में विद्यालय का कार्यभार संभाला था। इसके बाद उन्होंने स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक सुव्यवस्थित, अनुशासित वातावरण बनाने के प्रयास शुरू किए।
- शिक्षकों पर सहयोग न करने का आरोप: आवेदन के मुताबिक, प्राचार्य के इन सुधारात्मक कदमों से स्कूल के कुछ व्याख्याता और कर्मचारी नाखुश हैं और वे व्यवस्था बनाने में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
- छात्रों को मोहरा बनाने की साजिश: प्राचार्य का सीधा आरोप है कि अनुशासन और व्यवस्थित माहौल से परेशान होकर इन व्याख्याताओं ने अपने फायदे के लिए विद्यार्थियों को प्राचार्य के विरुद्ध भड़काया और उकसाया है, ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके। प्राचार्य कल्याण संघ ने संभाला मोर्चा, की ये प्रमुख मांगें
प्राचार्य के पक्ष में आते हुए प्राचार्य कल्याण संघ ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संघ ने साफ किया है कि अनुशासन का पालन कराने वाले अधिकारियों को इस तरह निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- निष्पक्ष जांच की मांग: पूरे मामले की एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
- दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई: छात्रों को उकसाने और स्कूल का माहौल खराब करने वाले चिन्हित व्याख्याताओं और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- प्राचार्य को सुरक्षा और समर्थन: कर्तव्य का पालन कर रहे प्राचार्य को मानसिक प्रताड़ना से बचाया जाए और उन्हें विद्यालय में निर्भीक होकर काम करने का सुरक्षित माहौल प्रदान किया जाए।
इस नए खुलासे के बाद शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में ले लिया है। प्राचार्य के आवेदन और प्राचार्य कल्याण संघ की मांगों के बाद अब जांच का दायरा केवल छात्रों के विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूल के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी की भी गहन जांच की जाएगी।
