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बिलासपुर में राजनैतिक उबाल: भाजपा महिला मोर्चा के कांग्रेस भवन घेराव पर पूर्व जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी का तीखा पलटवार, दी ‘कालिख पोतने’ की चेतावनी गणेशदत्त राजू तिवारी की रिपोर्ट

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): न्यायधानी बिलासपुर में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच राजनैतिक गतिरोध गहरा गया है। भाजपा महिला मोर्चा द्वारा बिलासपुर स्थित कांग्रेस भवन (कार्यालय) के घेराव और वहां जबरन प्रवेश किए जाने की घटना के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने मोर्चा संभाल लिया है।
विजय केशरवानी ने भाजपा की महिला नेत्रियों पर राजनैतिक मर्यादाओं को तार-तार करने और प्रशासनिक व्यवस्था व कानून का खुलेआम उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में दोषी भाजपा नेताओं के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की जाती है, तो कांग्रेस एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करेगी।
बिना पूर्व सूचना भाजपा नेताओं के घरों का घेराव करेगी कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय केशरवानी ने कड़े शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा, “भाजपा नेताओं ने आज जो कृत्य किया है, उसने छत्तीसगढ़ की राजनैतिक शुचिता को ठेस पहुंचाई है। यदि पुलिस प्रशासन दबाव मुक्त होकर त्वरित कार्रवाई नहीं करता और FIR दर्ज नहीं होती है, तो कांग्रेस कार्यकर्ता अब चुप नहीं बैठेंगे।”
उन्होंने एलान किया कि इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे भाजपा कार्यालय में दाखिल होंगे और विरोध स्वरूप उनके नाम की पट्टियों ) पर कालिख पोतेंगे।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला बिलासपुर के कांग्रेस भवन (जिला कार्यालय) में भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं के अचानक हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा कार्यालय परिसर के भीतर प्रवेश करने को कांग्रेस ने अपनी अस्मिता और मर्यादा पर सीधा हमला बताया है। विजय केशरवानी के इस तीखे बयान के बाद दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी स्तर पर टकराव होने की आशंका बढ़ गई है।
अलर्ट मोड पर बिलासपुर पुलिस व प्रशासन
कांग्रेस के इस कड़े रुख और ‘कालिख पोतो’ आंदोलन की खुली चेतावनी के बाद बिलासपुर का स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रमुख राजनैतिक कार्यालयों तथा वरिष्ठ नेताओं के आवासों के बाहर सुरक्षा बल तैनात किया जा रहा है।

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