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हादसों के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग

बिलासपुर के दो रावण दहन आयोजनों में आतिशबाजी के दौरान हादसे, टेंडर से भुगतान तक जांच की उठी मांग

          गणेशदत्त राजू तिवारी कि रिपोर्ट

बिलासपुर। विजयादशमी पर बुराई के प्रतीक रावण का दहन हुआ, लेकिन बिलासपुर के पुलिस ग्राउंड और बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के साइंस कॉलेज मैदान में आतिशबाजी के दौरान हुए हादसों ने सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ग्राउंड में दो पत्रकारों राकेश मिश्रा और शेख अशलम सहित कुछ लोगों के झुलसने की खबर सामने आई, वहीं साइंस कॉलेज मैदान में रॉकेट फटने से अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हुई। इन घटनाओं के बाद आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था, जिम्मेदारी तय करने और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, महापौर पूजा विधानी, कलेक्टर, एसपी, पत्रकारों और बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी थी। वहीं, साइंस कॉलेज मैदान के आयोजन में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू उपस्थित थे। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों में हादसों के सामने आने से आम नागरिकों, पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सुरक्षा मानकों के पालन पर उठे सवाल

दोनों घटनाओं के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आतिशबाजी के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। क्या भीड़ और दर्शकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी और हादसों के कारणों का पता लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने इन मुद्दों को उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में आम नागरिकों और पत्रकारों का घायल होना गंभीर विषय है। ऐसी घटनाओं को सामान्य मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि सुरक्षा मानकों के पालन की जिम्मेदारी किसकी थी और यदि कहीं लापरवाही हुई है, तो उसके लिए कौन जवाबदेह है।

24 लाख रुपये के टेंडर से भुगतान तक जांच की मांग

बेलतरा के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजन से संबंधित बताए जा रहे 24 लाख रुपये के टेंडर और पुलिस ग्राउंड के आयोजन संबंधी ठेके की शर्तों की जांच की मांग उठाई गई है। मांग है कि दोनों आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए किए गए प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी की समीक्षा की जाए।

यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ठेका शर्तों में सुरक्षा को लेकर क्या प्रावधान थे और उनका पालन हुआ या नहीं। यदि जांच में लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदारों, आयोजकों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। जांच लंबित रहने की स्थिति में भुगतान प्रक्रिया की भी नियमों के अनुरूप समीक्षा करने की मांग की गई है।

‘मेवा सदन संस्कृति’ को लेकर भी उठाए सवाल

मामले में राजनीतिक प्रभाव और कथित संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि ठेका प्रक्रिया से जुड़े लोगों के राजनीतिक संबंधों के चलते कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है।

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने जिला प्रशासन से दोनों घटनाओं की जांच की स्थिति सार्वजनिक करने, ठेका प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

जनता की सुरक्षा से बड़ा कोई ठेका नहीं

रावण दहन जैसे सार्वजनिक आयोजन हमारी परंपरा और सामूहिक उल्लास का हिस्सा हैं, लेकिन इनमें सुरक्षा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। दो अलग-अलग स्थानों पर हादसों की खबर सामने आने के बाद प्रशासन की जवाबदेही और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन घटनाओं की जांच, जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाता है। जनता की अपेक्षा है कि सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं।

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