1. PWD और जनप्रतिनिधि मौन व्रत पर, क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार?
2. ओवरलोडेड ट्रकों के तांडव से उखड़ा डामर, सड़क पर बने उल्कापिंड जैसे क्रेटर
गणेशदत्त राजू तिवारी कि रिपोर्ट
जयरामनगर। यदि आपको लगता है कि विकास एक्सप्रेस-वे पर बुलेट की रफ्तार से दौड़ रहा है, तो एक बार जयराम नगर-कोटमी सोनार-अकलतरा मार्ग की ओर अपनी गाड़ी का स्टेयरिंग मोड़ लीजिए। यकीन मानिए, आपका यह भ्रम चंद मीटर के सफर में ही चकनाचूर हो जाएगा। इस मार्ग पर पहुंचने के बाद राहगीरों को सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों के बीच सड़क के पुरातात्विक अवशेष खोजने पड़ते हैं।

रोजमर्रा की जद्दोजहद के लिए घर से निकलने वाले राहगीर शाम को अपने पैरों पर सकुशल लौटेंगे या प्लास्टर बंधवाकर स्ट्रेचर पर, इसकी कोई गारंटी नहीं बची है। आए दिन राहगीरों के टूटते हाथ-पैर और छिलता जिस्म अब इस इलाके की नियति बन चुके हैं।
मुनाफे के पहियों तले रौंदी गई सड़क
इस हड्डी-तोड़ सड़क के निर्माण का पूरा ‘श्रेय’ इस मार्ग पर स्थित राशि फैक्ट्री और सिस्टम की कथित साठगांठ को जाता है। 24 घंटे फैक्ट्री का भारी-भरकम बोझ और ओवरलोडेड माल ढोते दानवाकार ट्रकों ने सड़क का डामर तो कब का उधेड़ दिया है, अब वे सीधे आम आदमी की छाती और टैक्सपेयर्स के पैसों पर दौड़ रहे हैं। भारी वाहनों के अनवरत तांडव ने सड़क पर ऐसे गहरे क्रेटर बना दिए हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि इलाके में कोई उल्कापिंड (मेटियोराइट) गिरा हो। लेकिन इस धूल और दर्द के गुबार में फैक्ट्री का मुनाफा दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की कर रहा है।
AC कमरों में कैद संवेदनाएं और अंधा विभाग
क्या मजाल जो इस जन-पीड़ा का रत्ती भर भी असर हमारे माननीय जनप्रतिनिधियों या लोक निर्माण विभाग (PWD) के अफसरों पर पड़े! शायद अफसरों और नेताओं की लग्जरी गाड़ियों के सस्पेंशन इतने शानदार हैं कि उन्हें इन जानलेवा गड्ढों का अहसास ही नहीं होता। चुनाव के वक्त जनता के कदमों में बिछ जाने वाले नेताजी अब इस सड़क से ऐसे कन्नी काट रहे हैं, मानो यह इलाका उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं, बल्कि किसी और ग्रह पर आता हो। PWD के जिम्मेदार इंजीनियर शायद इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जब तक इन गड्ढों में गिरकर किसी की जान न चली जाए, तब तक फाइलों का पेट क्यों भरा जाए!
क्या प्रशासन को किसी खौफनाक हादसे का इंतजार है?
प्रशासन का यह ‘मौन व्रत’ न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है। अगर समय रहते प्रशासन की नींद नहीं टूटी और इस जर्जर मार्ग का फौरन कायाकल्प नहीं किया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब यह सड़क किसी बड़ी और खौफनाक दुर्घटना की पटकथा लिखेगी।
तब शायद प्रशासन जागेगा, कुछ संवेदनाओं के ट्वीट होंगे, मुआवजे के चेक बंटेंगे और फिर से गड्ढों को मिट्टी से पाटने का नया टेंडर निकालकर मामले पर लीपापोती कर दी जाएगी। फिलहाल, इस मार्ग से गुजरने वाली जनता से विनम्र गुजारिश है कि वे घर से निकलने से पहले अपना हेल्थ इंश्योरेंस दुरुस्त कर लें, क्योंकि सिस्टम अभी कोमा में है और जनता का सफर पूरी तरह राम भरोसे है।
