बेलतरा की बदहाल सड़कों पर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने उठाए सवाल, PWD के ठेकेदारों को राहत तो नगर निगम के ठेकेदारों के लिए इंतजार क्यों?
गणेशदत्त राजू तिवारी कि रिपोर्ट
बिलासपुर: बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में बदहाल सड़कों और निर्माण कार्यों से जुड़े भुगतान विवाद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगर निगम के अंतर्गत होने वाले सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि डामर की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ठेकेदारों के सामने आ रही आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना जरूरी है, लेकिन विभागों के बीच भुगतान और लागत को लेकर होने वाले विवाद का खामियाजा आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए।
गौरहा ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि जब लोक निर्माण विभाग ने डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था की है, तो नगर निगम के अंतर्गत सड़क निर्माण और मरम्मत का काम करने वाले ठेकेदारों के लिए समान परिस्थितियों में राहत की व्यवस्था क्यों स्पष्ट नहीं है? उन्होंने संबंधित विभागों से इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने और सड़क सुधार कार्यों में तेजी लाने की मांग की है।
डामर की कीमतों में वृद्धि और PWD के आदेश का मुद्दा
सड़क निर्माण में डामर एक महत्वपूर्ण निर्माण सामग्री है। इसकी कीमतों में अचानक वृद्धि होने से ठेकेदारों की लागत बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में पहले से निर्धारित दरों पर स्वीकृत निर्माण कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग ने 31 मई 2026 को आदेश जारी कर डामर की कीमतों में हुई असाधारण वृद्धि को ध्यान में रखते हुए निर्धारित शर्तों के अधीन ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान अथवा राहत देने की व्यवस्था की। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से 30 जून 2026 की अवधि के लिए लागू किए जाने का उल्लेख है।
इस निर्णय का उद्देश्य बढ़ी हुई लागत के कारण सड़क निर्माण और रखरखाव कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना बताया गया है। हालांकि, इस आदेश की वास्तविक शर्तों, पात्रता और लागू कार्यों की पुष्टि आधिकारिक आदेश से किया जाना आवश्यक है।
इसी आधार पर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सड़क निर्माण कार्यों की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि बढ़ी हुई लागत के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, तो संबंधित विभागों को इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
नगर निगम के ठेकेदारों के लिए राहत की व्यवस्था कहां?
गौरहा द्वारा उठाया गया प्रमुख सवाल PWD और नगर निगम के ठेकेदारों के बीच राहत की व्यवस्था को लेकर है। उनका आरोप है कि एक ओर PWD के अंतर्गत आने वाले कार्यों के लिए लागत वृद्धि के मद्देनजर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था की गई है, वहीं नगर निगम के अंतर्गत काम करने वाले ठेकेदार बढ़ी हुई लागत और भुगतान संबंधी समस्याओं को लेकर परेशान हैं।
यह मामला केवल ठेकेदारों के आर्थिक हितों तक सीमित नहीं है। सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में देरी होने पर इसका सीधा असर आम नागरिकों, वाहन चालकों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों पर पड़ता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि नगर निगम के अंतर्गत स्वीकृत सड़क कार्यों की वर्तमान स्थिति क्या है? कितने कार्य लागत वृद्धि या भुगतान संबंधी विवाद के कारण प्रभावित हैं? क्या ऐसे कार्यों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है? यदि व्यवस्था प्रस्तावित है, तो उसे लागू करने में कितना समय लगेगा?
इन सवालों पर नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है, ताकि वस्तुस्थिति का पता चल सके और अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त हो।
बेलतरा की इन सड़कों की बदहाली पर उठे सवाल
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र और बिलासपुर के विभिन्न हिस्सों में सड़क निर्माण एवं मरम्मत की स्थिति को लेकर गौरहा ने कई प्रमुख मार्गों का मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार, इन सड़कों की स्थिति में सुधार लाने के लिए संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहिए।
प्रमुख मार्ग, जिनकी स्थिति पर ध्यान देने की मांग की गई है:
- मंगला चौक से दीनदयाल कॉलोनी मार्ग — स्थानीय आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण इस मार्ग की स्थिति और मरम्मत कार्यों की प्रगति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
- अशोक नगर से बिरकोना मार्ग — इस सड़क पर आवागमन करने वाले लोगों की सुविधा के लिए सड़क की स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुधार कार्य कराए जाने की मांग है।
- चांटीडीह चौक से डीएलएस कॉलेज मार्ग — विद्यार्थियों और आम नागरिकों की आवाजाही को देखते हुए इस मार्ग की मरम्मत और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।
- सेंदरी से मोपका बायपास मार्ग — इस मार्ग पर सड़क की स्थिति और निर्माण अथवा मरम्मत कार्यों की प्रगति को लेकर संबंधित विभागों से जानकारी मांगी जानी चाहिए।
- राजकिशोर नगर चौक से छठघाट मार्ग — सड़क की स्थिति में सुधार और नियमित रखरखाव को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
- साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी मार्ग — इस मार्ग पर आवागमन की सुविधा बनाए रखने के लिए सड़क सुधार कार्यों की स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
इन मार्गों के संबंध में वास्तविक क्षति, स्वीकृत कार्यों और निर्माण की वर्तमान स्थिति का विभागीय निरीक्षण एवं आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर आकलन किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि किन सड़कों पर तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है और किन मार्गों के लिए व्यापक निर्माण कार्य की जरूरत है।
गड्ढे, धूल और दुर्घटनाओं का खतरा: आम जनता की परेशानी सबसे बड़ी
सड़कों की बदहाल स्थिति केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह यातायात सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई है। जर्जर सड़कों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है। धूल उड़ने से आसपास रहने वाले लोगों, दुकानदारों और राहगीरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषकर विद्यार्थियों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खराब सड़कों पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। यदि समय पर मरम्मत नहीं होती, तो छोटी समस्याएं भी आगे चलकर बड़ी परेशानी का कारण बन सकती हैं।
ऐसे में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी केवल बजट स्वीकृत करने या निविदा प्रक्रिया पूरी करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जरूरी है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयसीमा और वास्तविक प्रगति की नियमित निगरानी की जाए।
अंकित गौरहा ने उठाई पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों के आधार पर संबंधित विभागों से निम्नलिखित जानकारियां सार्वजनिक किए जाने की मांग महत्वपूर्ण है।
- स्वीकृत और लंबित कार्यों की सूची सार्वजनिक हो
PWD और नगर निगम अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की सूची सार्वजनिक करें। इसमें कार्य का नाम, स्वीकृत राशि, संबंधित ठेकेदार, कार्य प्रारंभ होने की तारीख, निर्धारित पूर्णता अवधि और वर्तमान स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
- ठेकेदारों के भुगतान की स्थिति स्पष्ट की जाए
किन निर्माण कार्यों का भुगतान लंबित है? भुगतान लंबित होने का कारण क्या है? क्या किसी मामले में डामर की कीमतों में वृद्धि के कारण अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई है? ऐसे मामलों में निर्णय कब तक लिया जाएगा? इन सवालों पर विभागीय स्थिति सामने आनी चाहिए।
- प्रत्येक सड़क के लिए निश्चित समयसीमा तय हो
सड़क सुधार कार्यों के लिए केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। प्रत्येक स्वीकृत कार्य की समयसीमा तय की जाए और उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। यदि किसी कार्य में देरी होती है, तो उसके कारणों और जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया जाना चाहिए।
- निर्माण की गुणवत्ता की नियमित जांच हो
सड़कों की मरम्मत और निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्री, निर्धारित मानकों और कार्य की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। यदि कहीं घटिया निर्माण या अनावश्यक देरी की शिकायत मिलती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
- विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए
PWD और नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सड़कों की स्थिति का समन्वित आकलन किया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां अस्थायी मरम्मत के माध्यम से लोगों को तत्काल राहत दी जाए और स्थायी निर्माण की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की योजना बनाई जाए।
भुगतान विवाद का समाधान हो, लेकिन जनता को राहत पहले मिले
सड़क निर्माण में ठेकेदारों की लागत, अनुबंध की शर्तें और भुगतान की प्रक्रिया प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय हैं। यदि डामर की कीमतों में वृद्धि के कारण वास्तविक लागत बढ़ी है, तो संबंधित अनुबंधों और लागू नियमों के अनुसार उसका परीक्षण किया जाना चाहिए।
लेकिन किसी भी भुगतान विवाद का समाधान होने तक नागरिकों को खराब सड़कों पर चलने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। जहां तत्काल मरम्मत आवश्यक है, वहां नियमानुसार त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, स्थायी निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि नगर निगम क्षेत्र की सड़कों के लिए लागत वृद्धि से संबंधित कोई राहत व्यवस्था लागू है या नहीं। यदि नहीं, तो संबंधित नियमों के अंतर्गत क्या विकल्प उपलब्ध हैं और इस संबंध में निर्णय लेने वाली सक्षम एजेंसी कौन है?
प्रशासन के सामने अब जवाबदेही की चुनौती
बेलतरा क्षेत्र की सड़कों का मुद्दा अब केवल निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों या ठेकेदारों के भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, विभागीय समन्वय और नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से जुड़ा सवाल बन गया है।
अंकित गौरहा द्वारा उठाए गए सवालों पर संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया और आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण में देरी के वास्तविक कारण क्या हैं और राहत की व्यवस्था को लेकर विभागों की वर्तमान नीति क्या है।
जनता की अपेक्षा है कि प्रशासन इन सवालों का स्पष्ट जवाब दे, लंबित कार्यों की स्थिति सार्वजनिक करे और सड़क सुधार की समयसीमा निर्धारित करे। विकास का आकलन केवल स्वीकृत बजट या जारी आदेशों से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि नागरिकों को सुरक्षित और सुविधाजनक सड़कें मिल रही हैं या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—विभागीय प्रक्रियाएं और भुगतान संबंधी विवाद अपनी जगह हैं, लेकिन बेलतरा की जनता को बदहाल सड़कों से राहत कब मिलेगी?
नोट: PWD के 31 मई 2026 के आदेश, उसकी लागू शर्तों और संबंधित सड़कों की वर्तमान स्थिति का आधिकारिक सत्यापन समाचार प्रकाशित करने से पहले किया जाना चाहिए। अंकित गौरहा के आरोपों तथा संबंधित विभागों के पक्ष को भी प्रकाशित करने से पहले दर्ज करना उचित होगा।


